भारत एक बहुजन देश है इसलिए मिलकर रहना ही समझदारी होगी ।

हम बहु जातियों के देश मे रहते है इसलिए मिलकर रहने मे ही समझदारी होगी यह जरूर है कि जब जातिया बनाई होगी उस वख्त ऐसी जरूरत होगी लेकिन समय एक जेसा नहीं रहता है। जब हमारा सविधान बना उस समय वेसी ही परिस्थितियां होगी। हमे चाहिए कि आज की परिस्थितियो के अनुसार रहना सीखे वरना मुश्किल हो सकती है। यह सभी को पता है कि एक ही बाप की औलाद है ! अलग-अलग काम करने के लिए यह जातियों का नाम दिया होगा जो कि भेदभाव होने की स्थिति को मध्य नजर रख कर सविधान मे कानून बनाया ताकि हद के दायरे मे रह कर रहे इसलए आज हमे सविधान को मानकर चलना चाहिए। कानून मे बदलाव तभी सम्भव है यदि सभी जातियों के लोगों मे सहमति होगी उसके लिए हमे वेसा माहोल बनाना होगा जो कि उसके विपरीत माहोल बन रहा है। मिलकर रहने का एक मात्र उपाय है, संतों की शरण मे रहना और उनका हुक्म मानना यदि ऐसा न हुआ तो देश विनाश की ओर जा सकता है।

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